एक सिफारिश छोटी सी
सुनो मांओ बाहर रिमझिम बरसात हो रही है
सुनो मांओ
बाहर रिमझिम बरसात हो रही है
मत बांधो अपने नन्हे मुन्नों को
घर के अन्दर किताबों,वीडियोगेम और कार्टूनों में
तुमने शायद देखा नहीं
तुम्हारे नन्हे की आँखें खिड़की के बाहर टिकी हुई हैं
क्या तुम्हे उसकी आँखों की प्यास नज़र नहीं आती?
उसे निकलने दो घर के बाहर
खेलने दो गीली मिटटी में
भीग लेने दो जी भर कर
यकीन मानो,
ये मिटटी उसे नुकसान नहीं पहुंचायेगी
उसे देखने दो
बारिश में भीगता पिल्ला
कैसे अपने रोंये खड़े करके कांप रहा है
शायद वह उसे किसी सूखी जगह पर रख दे
उसे सुनने दो
बूंदों का मीठा संगीत
शायद ये संगीत उसकी आत्मा में
सरगम बनकर उतर जाए
उसे छूने दो
भीगे हुए रंगबिरंगे फूलों को
शायद फूलों की कोमलता
उसके ह्रदय को भी कोमल बना दे
उसे जानने दो
मिटटी में एक इंच नीचे ही
केंचुए भी रहते हैं
जो हमारे दोस्त हैं
शायद वह केंचुओं से डरना छोड़ दे
उसे महसूस करने दो
मिटटी की सौंधी महक
शायद वह जान पाए
इससे अच्छा कोई इत्र नहीं बना
और जब वह उछल रहे हों
पानी के छींटे उडाते हुए
चुपके से उनका एक फोटो खींच लो
सहेज लो इन पलों को अपनी स्म्रतियों में
शायद ये सबसे अनमोल तस्वीर होगी
उसके लिए भी और तुम्हारे लिए भी...
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