Love Notesछत पे आ जाते थे कपड़ों का बहाना करकेअस्सी का दशक, दो आमने-सामने की छतें, दीवाली की मिठाई की थाली पर पहली छुअन — और कभी पूरी न हो सकी एक नज़री प्रेमकथा। याद है आज भी, खामोश मुस्कान बनकर।2 Jun, 20268 min readFreeRead
Love Notesवो जलते हुए ख़तथाने की मेज़ पर दो साल का इश्क बिखरा हुआ है — टेडी बियर, की-रिंग्स, सूखे गुलाब, ख़तों का ढेर। और एक सख्त चेहरे वाली हैड कॉन्स्टेबल की आँखों में बेतरह आंसू।2 Jun, 20264 min readFreeRead
Love Notesहैप्पी एनीवर्सरी, माय डियर व्हाटएवरएक वादा — सच बोलना है, चाहे चुभे। दस बरस बाद दो जुड़े हुए दिल पाते हैं कि जिसे 'वो' वाला प्रेम कहते हैं वो दोनों के बीच कभी था ही नहीं — और फिर भी।2 Jun, 20262 min readFreeRead
Love Notesहँस रही हैं और काजल भीगता है साथ-साथएक अप्रैल की ठंडी रात, छत पर बिछे दो बिस्तर, दो अजनबी लड़कियों के दो अजनबी दुःख — और एक नई दोस्ती जो रोते-रोते सुबह तक पक्की हो जाती है।2 Jun, 20263 min readFreeRead
Love Notesकितने दिन लगते हैं भुलाते, देख रहा हूँएक सर्द आधी रात, एक खुली डायरी का सबसे उदास पन्ना, और जगजीत सिंह की एक ग़ज़ल। दस बरस बीत गए — और लड़की डायरी के उसी पन्ने के नीचे एक और उदास पंक्ति दर्ज करती है।2 Jun, 20264 min readFreeRead
Love Notesओह इश्क... कितनी तरह से, कितनों की जान लोगे तुम?नौ अधूरी लम्हों की झलकियाँ — कोई हंसती खिलखिलाती लड़की, कोई ज़हीन लड़का, कोई नयी शादी, कोई फूट-फूटकर रोता प्रेमी। इश्क हर शक्ल में आता है।2 Jun, 20262 min readFreeRead
Love Notesबीस बरस पुराना मैला रूमाललड़का लड़की को प्रेम नहीं करता था, लड़की भी कहती है उसे उस लड़के से प्रेम नहीं था। मगर एक संदूक के सबसे नीचे तह किया एक मैला सा रूमाल चुपचाप कुछ और कहता है।2 Jun, 20261 min readFreeRead
Love Notesमुस्कानों का मौसमएक एस.टी.डी. बूथ, एक रोज़ शाम सात बजे आने वाली पुलिस की वर्दी वाली लड़की, और एक नौजवान की चुपचाप मांगी हुई दुआ — दस साल बाद कोतवाली में कुबूल हुई।2 Jun, 20264 min readFreeRead
Love Notesगले लग जानालड़का 22 बरस का था और लड़की 23 बरस की — आज दोनों 70 और 71 के हो चले हैं, और गलतियों के बाद कभी माफ़ी नहीं मांगते, बस गले लग जाते हैं।2 Jun, 20262 min readFreeRead
WhatsApp RomancePremiumवाट्सएपिया रोमांसवो लड़का इस ग्रुप में बहुत पहले से था ! लड़की ने महीने भर पहले ही ज्वाइन किया !11 Mar, 20162 min read79₹99Sign in to buy
KavitaPremiumरो लो पुरुषो , जी भर के रो लोबड़ा कमज़ोर होता है बुक्का फाड़कर रोता हुआ आदमी7 Feb, 20161 min read59₹99Sign in to buy
Kavitaहर पहर प्रेमआज सवेरे जब तुम्हे देख रही थी अपलक , परिंदों को दाना डालते हुए ,14 Dec, 20152 min readFreeRead