एक सरकारी फ़ाइल की आत्मकथा
1 min read
मैं एक सरकारी दफ्तर की फ़ाइल हूँ!
मैं एक सरकारी दफ्तर की फ़ाइल हूँ! मैं शासन को चलाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हूँ!
मैं धनाकर्षण बल के सिद्धांत पर कार्य करती हूँ! और मेरा ईंधन भी यही है!
सिद्धांत के मामले में कभी समझौता नहीं करती! मेरे लिए अमीर, गरीब, लाचार , अपंग सब बराबर हैं!
जितना धन उन्होंने पंद्रह वर्षों में टैम्पो से मेरे दफ्तर के चक्कर लगाने में, जगह जगह अपनी समस्या के निराकरण के लिए आवेदन देने में , गर्मी में बीमार पड़कर अपना इलाज करने में और चप्पलें घिसने पर नयी चप्पलें खरीदने में खर्च किया, उतना अगर मुझ पर रख देते तो मैं कब की आगे बढ़ गयी होती!
जब तक बाबूराज है तब तक मैं इसी तरह दफ्तरों में लाल फीते में बंधी सजती रहूंगी!
Related writings
Comments
No comments yet.