हर बिछड़ना ,बिछड़ना नहीं ...
वो अब शायद दोबारा कभी नहीं मिलेगी !
वो अब शायद दोबारा कभी नहीं मिलेगी !
डॉक्टर के क्लीनिक पर मेरे साथ उसकी माँ भी अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थी ! वो लाल रंग की एक सुन्दर फ्रिल वाली फ्रॉक के साथ लाल ऊन के फ़ीतेदार जूते पहने एक छह माह की बहुत प्यारी बच्ची थी ! पांच दस मिनिट उसे पुचकारने से वो मुस्कुराने लग गयी थी ! फिर जब उसे गोद में लेने को हाथ बढ़ाया तो वह दोनों हाथ फैलाकर मेरी गोद में लपक आई ! अगले बीस मिनिट तक हम खूब हंसे ,खिलखिलाए ! उसकी माँ उसे मेरे पास ही छोड़कर डॉक्टर को दिखाने चली गयी ! वो अपनी उजली चमकदार आँखों से मुझे देखती और मैं गुदगुदी करने के लिए उंगलियां उसकी ओर बढ़ाती और वो ज़ोर से खिलखिला उठती !
हम दोनों एक दूसरे के साथ खुश थे ! उसकी माँ ने बाहर आकर उसे गोद में लिया और जाने लगी ! मैंने उसे टाटा किया और वो अपने दोनों हाथ फैलाकर मेरी गोद में आने के लिए लगभग पूरी लटक गयी ! वो मचलती रही और कार तक जाते जाते वो दोनों हाथ फैलाए मेरी गोद में आना चाह रही थी ! एक पल को ऐसा लगा जैसे वो मुझे बहुत अच्छे से जानती है !
खैर उसे जाना था ..वो चली गयी !
उसके जाने के बाद न जाने कितने चेहरे आँखों के सामने से घूम गये जो जीवन के किसी न किसी मोड़ पर मिले थे फिर कभी न मिलने के लिए ! उन्हें रुकने की ज़रुरत भी न थी ..चंद मिनिटों,घंटों या दिनों में वो अपना काम बखूबी कर गए थे ! इनमे से कई हमें बहुत कुछ दे जाते हैं अपनी कहानियों , अनुभवों की शक्ल में और कई हमसे कुछ ले जाते हैं ! ऐसे लोगों का मिलना शायद हमें अन्दर से समृद्ध करने के लिए होता है ! तभी तो वो चेहरे कभी न भूल सके !
ऐसे लोग कभी बिछड़ते नहीं ...वे केवल मिलते हैं !
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