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हर पहर प्रेम
आज सवेरे जब तुम्हे देख रही थी अपलक , परिंदों को दाना डालते हुए ,
14 Dec, 20152 min read
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Readआज सवेरे जब तुम्हे देख रही थी अपलक , परिंदों को दाना डालते हुए ,
कमला के आदमी ने कमला के गाल सुजाये खींचा पटका और घर से निकाल दिया
सबसे उदास और बदरंग मौसमों में मैंने चुने सबसे चटक रंग अपनी कुर्ती के लिए
बारिश का होना केवल काले बादलों से बूंदों का गिरना थोड़े ही है
जब भी देखो किसी चिड़िया को चहकते, फुदकते बस उसी को देखना एकटक