बीस बरस पुराना मैला रूमाल
लड़का लड़की को प्रेम नहीं करता था, लड़की भी कहती है उसे उस लड़के से प्रेम नहीं था। मगर एक संदूक के सबसे नीचे तह किया एक मैला सा रूमाल चुपचाप कुछ और कहता है।
अंतिम विदा के वक्त बस में हिचकियाँ लेकर रोती लड़की की आँखें लड़के ने अपने रूमाल से पोंछीं थीं। इतने में बस स्टार्ट हुई और लड़का लड़की की हथेलियों में रूमाल रखकर नीचे उतर गया।
बस.. इतना ही हुआ था जब आखिरी बार लड़की ने लड़के को देखा था। लड़का लड़की को प्रेम नहीं करता था।
लड़की भी कहती थी कि उसे प्रेम वगेरह नहीं था उस लड़के से। लेकिन जब बस चलने के बाद भी लड़की की सिसकियाँ बंद न हुईं तो बगल में बैठी महिला ने कंधे पर हाथ रखकर बड़े कोमल स्वर में पूछा था —
" कौन था वो तुम्हारा "
लड़की ने रोते रोते ही कहा था " सबकुछ " और उसी महिला की गोद में सर छुपाकर बिलख पड़ी थी। महिला ने फिर कुछ नहीं पूछा। बस एक ठंडी सांस ली और लड़की को अपनी गोद में जीभर कर रोने दिया।
लड़की को आज याद नहीं कि उसने उस महिला को क्या जवाब दिया था।
लड़का आज भी प्रेम नहीं करता लड़की को। लड़की भी कहती है कि उसे उस लड़के से प्रेम नहीं था। दोनों की जिंदगियां कितना आगे भी तो बढ़ गयीं थीं!
मैं भी मान लेती कि ये प्रेमकथा नहीं थी अगर एक दिन एक पुराने संदूक में सबसे नीचे तह किया रखा मैला सा रूमाल मुझे न मिलता!
प्रेम को नकारने से प्रेम नहीं मरता। वो तो जाने किस कोने में अपनी इत्तू सी जगह बनाकर मुस्कुराता हुआ बैठा रहता है चुपचाप — कभी खतों में, कभी चाबी के छल्लों में, कभी किसी सूखे फूल में तो कभी संदूक में बीस बरस से ऐंवैई रखे एक मुचड़े हुए रूमाल में। ❤️
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