
गले लग जाना
लड़का 22 बरस का था और लड़की 23 बरस की — आज दोनों 70 और 71 के हो चले हैं, और गलतियों के बाद कभी माफ़ी नहीं मांगते, बस गले लग जाते हैं।
लड़का 22 बरस का था और लड़की 23 बरस की। दोनों उस रोज़ एक बगीचे में गुलमोहर के तले एक बेंच पर बैठे थे। दोनों एकदम खामोश थे, एक ऐसी बेचैन उमस सरीखी चुप्पी पसरी हुई थी जैसे पानी बरसने के ठीक पहले होती है। कुछ होने का इंतज़ार... बड़ी तकलीफ से मर-मर के बीतता वक्त।
लड़की बार-बार लड़के को कातरता से देखती, फिर वह कातरता एक अनचाही कठोरता में बदल जाती और लड़की दूसरी ओर देखने लगती। लड़का शांत दिखाई पड़ता था मगर उसके चेहरे पर प्रेम की पीली उदासी छाई हुई थी।
दोनों में दो दिन पहले झगड़ा हुआ था। दो दिन पहले ठीक इसी बेंच से लड़की गुस्सा होकर चली गयी थी। लड़का बैठा रहा था देर तक। लड़का कल भी आकर बैठा था। लड़की नहीं आयी थी।
तीसरे दिन लड़की आयी थी और दोनों के बीच असहनीय खामोशी की बर्फ जमती जा रही थी। लड़की की गलती थी और वह पछता रही थी। माफ़ी माँगना चाहती थी मगर शब्द जैसे बाहर न फूटते थे।
अचानक उसने लड़के को देखा और कुछ कहने को होंठ खोले...
लड़के ने अपनी पसीजी हथेली उसके होंठों पर रख दी और कहा —
" ना.. कभी माफ़ी मत माँगना, बस गले लग जाना "
लड़की लपककर लड़के के गले लग गयी। लड़के की गुलाबी कमीज भीगती रही। आखिर उमस के बाद सुहानी बरसात हो गयी। गुनगुनी ऊष्मा से सारी बर्फ पिघल गयी।
अब लड़का 70 बरस का है और लड़की 71 बरस की। दोनों गलतियां करते हैं और कभी माफ़ी नहीं मांगते, बस गले लग जाते हैं।
लड़का शरारत से कहता है — " अगर गलतियों का नतीजा इतना हसीन हो तो कोई भला क्यों खुद को और किसी को गलती करने से रोके। "
लड़की लाड़ से मुस्कुरा देती है और कहती है — " जो गलती करना आसान बना दे, वही है सबसे प्यारा साथी "
दो बूढ़े चेहरों पर झुर्रियों की अनगिन लहरों में जुड़वां गुलाबी मछलियां तैरने लगती हैं। ❤️
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