ओह इश्क... कितनी तरह से, कितनों की जान लोगे तुम?
नौ अधूरी लम्हों की झलकियाँ — कोई हंसती खिलखिलाती लड़की, कोई ज़हीन लड़का, कोई नयी शादी, कोई फूट-फूटकर रोता प्रेमी। इश्क हर शक्ल में आता है।
कोई हंसती खिलखिलाती लड़की अचानक एक सुहाने मौसम में सिर्फ इसलिए बेतरह उदास हो उठती है कि ऐसे ही किसी मौसम में कभी किसी ने उसे चूमकर कहा था कि वह उसे प्रेम करता है।
कोई बेहद ज़हीन लड़का सिर्फ इसलिए अमेरिका न जाकर एक छोटे से शहर में छोटी सी नौकरी करता रहता है कि उस शहर में एक गोलमटोल सी लड़की रहती है जिससे लड़का कभी कुछ कह ही नहीं पाया।
कोई नयी-नयी शादी हुई लड़की अपने बेहद प्रेम करने वाले पति के सीने से लगी किसी ऐसे लड़के के लिए आँखें नम कर बैठती है जो उसे कभी प्रेम ही नहीं करता था।
कोई लड़की फूट फूट कर रो पड़ती है जबकि उसका प्रेमी उस पर मुहब्बत की बारिश कर रहा होता है।
कोई लड़का मिड एज में आकर किसी ख़ास शहर के ख़ास रेस्त्रां की ख़ास टेबल पर घण्टों अकेले सिगरेट पीते गुज़ार देता है।
कोई लड़की अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने जाते समय बच्चों की भीड़ में एक झलक उस नन्हे बच्चे की देखने रुक जाती है जिसकी शक्ल ठीक उस लड़के जैसी है, कभी जिसका चेहरा हथेलियों में भरकर कहा करती थी कि उसकी नाक बिलकुल तुम्हारी तरह होगी और आँखें मेरी तरह।
कोई लड़का सिर्फ इसलिए एक पुरानी गुलाबी रंग लगी सफ़ेद शर्ट सालों से संभाले हुए है कि एक लड़की ने अपने लाल दुपट्टे के साथ उसे धो दिया था।
कोई लड़की निर्मल वर्मा को पढ़ते हुए एक जगह ठिठकती है जहाँ वे कहते हैं कि पीड़ा का सम्बंध प्रेम से होता है — जब वह धागा खिंचता है तो पीड़ा होती है। आंखों में आँसू और हृदय में पीड़ा लिए लड़की सारी रात उसी पंक्ति पर ठिठकी रहती है।
कोई लड़का और कोई लड़की अलग-अलग शहरों में रोज़ शाम एक ही वक्त पर कुछ पलों को चाँद को देखते हैं। क्योंकि जुदाई के वक्त उन्होंने एक दूसरे से मुलाक़ात की यही सूरत निकाली थी।
ओह इश्क... कितनी तरह से, कितनों की जान लोगे तुम? ❤️
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