Ghazalएक पुरानी ग़ज़लजब से तकदीर कुछ खफा सी है जीस्त भी मिलती है गैरों की तरह19 Aug, 20081 min readFreeRead
Nazmए खुदा...बचपन को तो बख्शरात के वीराने में उसकी किलकारी जैसे किसी ने साँझ ढले राग यमन छेड़ दिया हो28 Jul, 20081 min readFreeRead